Sadafal dev dharamchandra dev and swatantra dev ji maharaj

विघन्न विपत्ति दुख नाश का, असरण शरण अजोंर ॥
दीन बंधु आरत हरण , प्रणत पाल मम देव!
आश्रय नाथ अनाथ का , आस एक जन सेव !!

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