मन को कैसे शांत करें? Sadguru Acharya Sri Swatantra Dev Ji Maharaj Ki Amritvani

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Sadguru Acharya Sri Swatantra Dev Ji Maharaj Ki Amritvani
Sadguru Acharya Sri Swatantra Dev Ji Maharaj Ki Amritvani

मन को कैसे शांत करें?

सद्‌गुरु, उन चीज़ों के रूप में अपनी पहचान बनाने के कारण और परिणाम के बारे में बता रहे हैं, जो हम नहीं हैं। वे बताते हैं कि जब हम उन चीज़ों के आधार पर अपनी पहचान बना लेते हैं, जो हम नहीं हैं – जैसे हमारी संपत्ति, पद, परिवार, पढ़ाई वगैरह, तब मन का शांत होना असंभव हो जाता है।

 

एक योगी, युगदृष्टा, मानवतावादी, सद्‌गुरु एक आधुनिक गुरु हैं, जिनको योग के प्राचीन विज्ञान पर पूर्ण अधिकार है। विश्व शांति और खुशहाली की दिशा में निरंतर काम कर रहे सद्‌गुरु के रूपांतरणकारी कार्यक्रमों से दुनिया के करोडों लोगों को एक नई दिशा मिली है। दुनिया भर में लाखों लोगों को आनंद के मार्ग में दीक्षित किया गया है।

Sadguru Acharya Sri Swatantra Dev Ji Maharaj Ki Amritvani

True Lines-

 

आसन है तन शान्ति का, मन शांति अभ्यास। आतम अनुभव शांति का, जाहि छुटे अध्यास।।

 

प्रभु प्रशाद सद्गुरु दया मना होय स्वाधीन । अन्य युक्ति कोई नही लगे सद्गुरु चरण अधीन।।

 

नित्य अनादि सदगुरुदेव की जय। स्वयंसिद्ध सदगुरुदेव की जय। अभ्यास सिद्ध सदगुरुदेव की जय। परम्परा सदगुरुदेव की जय। ब्रह्मविद्या विहंगम योग की जय। अ’ अंकित श्वेत ध्वजा की जय।

 

आसन है तन शांति का ,मन शांति अभ्यास। आतम अनुभव शांति का, जाहि छुटे अध्यास।

 

गुरु मण्डल में पैठकर, अन्तर सुमिरन साध। मन व प्राण गुरु युक्ति से, सन्धि में स्थिर बाँध।।

 

“गुरु कृपा ही केवलम” आध्यात्मिक कल्याण के लिए गुरु कृपा परम् आवश्यक है। सदगुरु की कृपा से ही मन पर पूर्ण नियन्त्रण सम्भव है।

 

यही तन में मन कहाँ बसे ,निकस जाय केहि ठौर । गुरुगम हो तो परख लो ,नही तो गुरु करो और

 

मन व पवन को बाँधि के, कारण कीन विलीन। यह महिमा है योग की, सद्गुरु शरण अधीन।।

 

बिहंगम योग ही एक माध्यम है जिससे मन को कंट्रोल करने की बिधि को बताया जाता है

 

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